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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और लेबर बहà¥à¤¤ थकानेवाली अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ हैं और इन दोनों की वजह से मांओं के पास अपने नवजात शिशà¥à¤“ं को दूध पिलाने के लिठबहà¥à¤¤ कम या बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ शकà¥à¤¤à¤¿ नहीं बचती। डिलीवरी के बाद घंटों बैठकर बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना, उसे थका हà¥à¤† और बेदम बना देता है। यही कारण है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° माताओं को अपनी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के लिठलेटकर अपने बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना पसंद करते हैं। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से अधिक सपोरà¥à¤Ÿ मिलता है और बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के लिठबहà¥à¤¤ देर तक बैठने के तनाव से राहत à¤à¥€ मिलती है।
लेकिन सवाल यह है, कà¥à¤¯à¤¾ यह बचà¥à¤šà¥‡ के लिठà¤à¥€ उतना आरामदायक है जैसा कि यह मां के लिठहोता है? अधिकांश माताओं का कहना है कि वे इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सहज महसूस करते हैं और उनके बचà¥à¤šà¥‡ के लिठà¤à¥€à¥¤ हालांकि, जब मैंने डॉ. बीना जयसिंह (कंसलà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट, गायनकोलॉजी, आबà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸, मैटरà¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤², बेंगलà¥à¤°à¥) से बात की, और यह जानने की कोशिश की कà¥à¤¯à¤¾ यह लेटकर बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना ठीक है? जानें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¥à¤¯à¤¾ कहा: 'लेटकर दूध पिलाना à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जो सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मांà¤à¤‚ पसंद करती हैं। à¤à¤¸à¥€ महिलाà¤à¤‚ जो सीधे बैठकर अपने बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाने में सकà¥à¤·à¤® नहीं है, बिसà¥à¤¤à¤° में लेटे-लेटे बचà¥à¤šà¥‡ को किसी à¤à¤• तरफ लिटाकर दूध पिलाने से शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ करने में मदद मिलती है।
हालांकि, यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की सलाह केवल तब तक के लिठदी जाती है जब तक कि मां सीधे बैठकर अपने बचà¥à¤šà¥‡ को पकड़ न सके। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के 1-2 दिन बाद, हम माताओं को सीधे बैठने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करते हैं और दूध पिलाने की कोशिश करने के लिठकहते हैं, ताकि फेफड़ों में दूध जाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम रहे। दरअसल लेटकर दूध पिलाने से बचà¥à¤šà¥‡ के फेफड़ों में दूध जाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ काफी अधिक होती है। यह शिशà¥à¤“ं के लिठघातक हो सकता है इसलिà¤, लेटकर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की सलाह बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं की जाती है।'' इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दूध पिलाने की सलाह केवल उन माताओं को दी जाती है, जिनकी 24 घंटों के अंदर सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ सरà¥à¤œà¤°à¥€ हà¥à¤ˆà¥¤
1. पेट का दरà¥à¤¦- जहां बचà¥à¤šà¥‡ दूध के साथ हवा à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करते हैं, जिससे पेट में दरà¥à¤¦ हो सकता है और वह लगातार रोता रहता है।
2. कान में संकà¥à¤°à¤®à¤£- अगर दूध मà¥à¤‚ह से फैल जाता है और कान की नहर या ईयर कैनाल तक पहà¥à¤‚च जाता है।
3. दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ या मौत- अगर मां दूध पिलाते हà¥à¤ सो जाठऔर नींद में बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर पर à¤à¤¾à¤° पड़े।
इसलिठअगर आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ को लेटकर दूध पिलाने की योजना बना रही हैं, तो à¤à¤¸à¤¾ करने से पहले इसके फायदे और नà¥à¤•सान समठलें। अपने बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाने की सही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जानने के लिठअपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° या किसी à¤à¤‚टीनेटल (antenatal) à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से बात करें। अगर पीठदरà¥à¤¦ या अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° तकलीफ के कारण आपको अपने बचà¥à¤šà¥‡ को बैठकर दूध पिलाने में परेशानी हो रही है, तो किसी लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ की सहायता से, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के लिठà¤à¤• आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तैयार करने की कोशिश करें जो आपके और आपके बचà¥à¤šà¥‡ दोनों के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो।
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